19 Sep 2026, 06:06 PM

घर के बाहर मिली थी नोटों से भरी बोरी, जस्टिस वर्मा पर तीनों आरोप साबित हुए
जली नकदी से महाभियोग तक: जस्टिस यशवंत वर्मा पर जांच समिति की रिपोर्ट में तीनों आरोप सिद्ध
सरकारी आवास के स्टोररूम में मिली नकदी, साक्ष्यों के संरक्षण में लापरवाही और असंतोषजनक जवाब को लेकर समिति ने आरोपों को सही माना; इस्तीफे के बावजूद महाभियोग की संभावना पर उठे सवाल
14 मार्च 2025 की रात दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी आवास में लगी आग के बाद स्टोररूम से बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी मिलने का मामला सामने आया था। इसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया और जस्टिस वर्मा पर गंभीर सवाल उठे।
मामले की जांच के लिए गठित समिति ने अब अपनी रिपोर्ट में उनके खिलाफ लगाए गए आर्टिकल ऑफ चार्ज I, II और III—तीनों आरोपों को सिद्ध माना है। समिति ने रिपोर्ट, दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों को सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सौंप दिया है।
₹500 के नोटों से जुड़ा पहला आरोप
जांच का सबसे प्रमुख बिंदु नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रेसेंट स्थित सरकारी आवास के स्टोररूम से मिली बड़ी मात्रा में नकदी थी। रिपोर्ट के अनुसार, नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत और स्वामित्व को लेकर जस्टिस वर्मा की ओर से दिया गया स्पष्टीकरण समिति को संतोषजनक नहीं लगा।
समिति ने इस आरोप को सिद्ध माना।
साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में लापरवाही का आरोप
दूसरे आरोप में समिति ने पाया कि मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों को उचित तरीके से सुरक्षित और संरक्षित नहीं किया गया। कानूनी सीलिंग और निरीक्षण से पहले स्टोररूम की स्थिति में बदलाव की बात भी सामने आई।
कुछ करेंसी नोटों के गायब या अनुपलब्ध होने का स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं मिलने को भी समिति ने गंभीर माना।
हालांकि, रिपोर्ट में यह निष्कर्ष नहीं है कि जस्टिस वर्मा ने स्वयं कोई नोट हटाया था।
जवाब को लेकर भी उठे सवाल
तीसरे आरोप में समिति ने जस्टिस वर्मा के स्पष्टीकरण, विशेष रूप से 22 मार्च 2025 को दिए गए जवाब, को संतोषजनक नहीं माना।
समिति के अनुसार उनका रुख टालमटोल वाला था और उनके जवाब में संस्थागत जिम्मेदारी के अनुरूप अपेक्षित स्पष्टता नहीं थी। स्वतंत्र गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर समिति ने इस आरोप को भी सिद्ध माना।
अब आगे क्या होगा?
जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है?
सूत्रों के अनुसार, आगामी शीतकालीन सत्र में उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की संभावना पर विचार हो सकता है।
लेकिन मामला इसलिए पेचीदा है क्योंकि जस्टिस यशवंत वर्मा अप्रैल 2025 में ही राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज चुके हैं। इसके बावजूद उनका नाम इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों की सूची में बना हुआ है।
यही वजह है कि अब यह सवाल उठ रहा है कि इस्तीफा भेज चुके जज के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया किस हद तक आगे बढ़ सकती है?
यह मामला इसलिए भी असाधारण माना जा रहा है क्योंकि इस्तीफे के बाद भी उनके खिलाफ जांच पूरी हुई और समिति ने तीनों आरोपों को सिद्ध पाया।



