19 Sep 2026, 05:46 PM

जयपुर: सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंचे CJP कार्यकर्ताओं को ग्रामीणों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
जयपुर के रामपुरा-कंवरपुरा में सरकारी स्कूल को लेकर बवाल, CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट और गाड़ियों में तोड़फोड़ का आरोप
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के बगरू इलाके के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत स्कूल का जायजा लेने पहुंची टीम का ग्रामीणों ने विरोध किया। इस दौरान हंगामा इतना बढ़ गया कि टीम के सदस्यों के साथ कथित मारपीट और वाहनों में तोड़फोड़ के आरोप सामने आए हैं।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि स्कूल की स्थिति देखने पहुंची उनकी टीम पर हमला किया गया और उनकी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए गए। रांका ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी CJP की टीम
CJP ने 15 अगस्त से देशभर के ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने का ऐलान किया था। अभियान के तहत स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का सामाजिक ऑडिट करने, स्थानीय अभिभावकों और पंचायत प्रतिनिधियों को स्कूलों की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही गई थी।
इसी अभियान के तहत CJP की टीम रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल का जायजा लेने पहुंची थी। रिपोर्टों के अनुसार, टीम के पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। मौके पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ विरोध और रास्ता रोकने की स्थिति भी सामने आई। इसके बाद विवाद बढ़ गया।
ग्रामीणों के विरोध के पीछे क्या वजह?
रामपुरा-कंवरपुरा का यह सरकारी स्कूल पहले से ही अपनी जर्जर हालत को लेकर चर्चा में रहा है। अक्टूबर 2025 में NDTV की रिपोर्ट में बताया गया था कि स्कूल का भवन जर्जर होने के कारण वहां कक्षाएं संचालित करना मुश्किल था और वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बच्चों को गाय के तबेले में पढ़ना पड़ रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद स्कूल के लिए स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।
एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, रामपुरा-कंवरपुरा का स्कूल वर्ष 1985 से संचालित हो रहा है और लंबे समय से मरम्मत के अभाव में भवन की हालत खराब होती गई। रिपोर्ट में छत की क्षतिग्रस्त पट्टियों और लोहे की गार्डर के सहारे टिके ढांचे का भी उल्लेख किया गया था।
यानी, CJP की टीम जिस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची थी, वहां शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं।
आशुतोष रांका ने लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि उनकी टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की गई और वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। बाद की रिपोर्टों में रांका ने अपने साथ भी मारपीट, कपड़े फाड़े जाने और महिलाओं के साथ बदसलूकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर पुलिस मौजूद होने के बावजूद पर्याप्त हस्तक्षेप नहीं किया गया।
रांका ने इस घटना के लिए भाजपा से जुड़े लोगों को जिम्मेदार ठहराया और कार्रवाई की मांग की है। दूसरी तरफ, इस मामले में भाजपा या स्थानीय ग्रामीणों की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया और पुलिस की जांच संबंधी अंतिम जानकारी सामने आने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री पर भी विवाद
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राजस्थान में सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों की एंट्री और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर भी विवाद चल रहा है।
हाल ही में राजस्थान शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों के प्रवेश और फोटो-वीडियोग्राफी को लेकर निर्देश जारी किए थे। CJP ने इस आदेश का विरोध किया और कहा कि स्कूलों का निरीक्षण जारी रहेगा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शिक्षा विभाग के आदेश में CJP के अभियान का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया गया था। विभाग ने विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरिमा और निजता को आदेश का आधार बताया था।
CJP और राजस्थान सरकार के बीच बढ़ी तकरार
रामपुरा-कंवरपुरा की घटना से पहले भी CJP और राजस्थान सरकार के बीच सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर बयानबाजी सामने आ चुकी है। 19 अगस्त को आशुतोष रांका ने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को चुनौती देते हुए कहा था कि वे अपने कार्यकाल के दौरान बनाए गए 10 बेहतरीन शिक्षण परिसरों को दिखाएं, जिसके बाद CJP की टीम उनका दौरा करेगी।
इससे साफ है कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति अब CJP के अभियान का प्रमुख मुद्दा बन चुकी है और रामपुरा-कंवरपुरा की घटना ने इस अभियान को राजनीतिक विवाद के केंद्र में ला दिया है।
क्या है ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान?
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए इस अभियान की घोषणा की थी। अभियान का उद्देश्य स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की जमीनी स्थिति सामने लाना और स्थानीय स्तर पर स्कूलों के सामाजिक ऑडिट को बढ़ावा देना बताया गया है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के एक सरकारी स्कूल के निरीक्षण से की गई, जहां बच्चों से उनकी समस्याओं के बारे में बात कर स्थानीय सरपंच से भी चर्चा की गई थी।
अब राजस्थान के रामपुरा-कंवरपुरा में हुए विवाद के बाद सवाल यह है कि सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर चर्चा और निरीक्षण का यह अभियान आगे किस दिशा में जाता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल
रामपुरा-कंवरपुरा के सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर सवाल नया नहीं है। स्कूल की जर्जर इमारत और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर पहले भी रिपोर्टें सामने आ चुकी हैं। अब CJP की टीम के निरीक्षण के दौरान हुए कथित विवाद ने इस पुराने मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है।
हालांकि, मारपीट, तोड़फोड़ और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच या प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



