19 Sep 2026, 05:46 PM

वंदे मातरम पर BJP का बड़ा प्रस्ताव, कांग्रेस के दो अंतरों तक सीमित रखने के फैसले की कड़ी निंदा
BJP का ऐलान- ‘वंदे मातरम’ की पूरी विरासत और सम्मान की रक्षा के लिए देशभर में चलाएंगे अभियान
नई दिल्ली, 22 अगस्त 2026: ‘वंदे मातरम’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव अब और तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक प्रस्ताव पारित करते हुए कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की कड़ी निंदा की, जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरों के गायन को जारी रखने का निर्णय लिया गया था।
BJP का यह प्रस्ताव 19 अगस्त को हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक के बाद आया है। कांग्रेस ने इस बैठक में 1937 के उस ऐतिहासिक प्रस्ताव को फिर से स्वीकार किया था, जिसके तहत पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो अंतरों के गायन की परंपरा अपनाई गई थी।
नितिन नबीन ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी जानकारी
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पार्टी के प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, गरिमा, ऐतिहासिक विरासत और राष्ट्रीय महत्व की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
आकाशवाणी की रिपोर्ट के मुताबिक, BJP ने कांग्रेस के फैसले का स्पष्ट विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रगीत को कथित तौर पर सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टिकरण या वोट बैंक की राजनीति के अधीन नहीं किया जा सकता। BJP ने यह भी कहा कि वह ‘वंदे मातरम’ के इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और इसकी गौरवशाली विरासत को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएगी।
BJP ने कहा- पूरे ‘वंदे मातरम’ के सम्मान की रक्षा होगी
BJP के प्रस्ताव में ‘वंदे मातरम’ को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में रेखांकित करते हुए कहा गया कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और भारत की राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक है।
पार्टी ने पूरे गीत की विरासत, गरिमा और राष्ट्रीय चरित्र को बनाए रखने का संकल्प जताया। BJP का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लोगों में राष्ट्रभक्ति, त्याग और संघर्ष की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
सरकार ने भी 2026 में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं। संस्कृति मंत्रालय के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को भी इस वर्ष राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ से जोड़ा गया था।
कांग्रेस ने 1937 के फैसले को क्यों दोहराया?
कांग्रेस कार्यसमिति ने 19 अगस्त की बैठक में स्पष्ट किया कि पार्टी के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस ने इसके पीछे 1937 में लिए गए निर्णय का हवाला दिया।
कांग्रेस के अनुसार, उस समय राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को लेकर धार्मिक संवेदनशीलता से जुड़े सवाल उठे थे। इसके बाद पार्टी ने सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए शुरुआती दो अंतरों को अपनाने का फैसला किया था। कांग्रेस का तर्क है कि इन शुरुआती अंतरों में मातृभूमि की प्रशंसा है, जबकि बाद के हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों और देवी-देवताओं के संदर्भ आते हैं।
BJP ने कांग्रेस पर लगाया तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति का आरोप
BJP ने कांग्रेस के इस फैसले को केवल एक संगठनात्मक निर्णय मानने से इनकार किया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के कारण राष्ट्रगीत के पूर्ण स्वरूप को लेकर सीमित रुख अपनाया है।
BJP नेताओं ने 1937 के दौर के राजनीतिक घटनाक्रम और मुस्लिम लीग की आपत्तियों का भी उल्लेख किया है। BJP अध्यक्ष नितिन नबीन इससे पहले कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगा चुके हैं कि पार्टी ने 1937 के फैसले को फिर से अपनाकर राष्ट्रगीत के प्रति कथित अनादर को संस्थागत रूप दे दिया है।
हालांकि, कांग्रेस का कहना है कि उसका फैसला ‘वंदे मातरम’ के सम्मान को कम करने वाला नहीं है, बल्कि वह अपने ऐतिहासिक निर्णय और सभी समुदायों की धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों में इसके शुरुआती दो अंतरों का गायन करती है।
2026 में ‘वंदे मातरम’ को मिला नया कानूनी संरक्षण
इस पूरे विवाद के बीच 2026 में ‘वंदे मातरम’ को लेकर एक महत्वपूर्ण कानूनी बदलाव भी हुआ है।
संसद ने Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 पारित किया, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून का रूप दिया गया। इस संशोधन के जरिए ‘वंदे मातरम’ को Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 की धारा 3 के दायरे में लाया गया। इसका उद्देश्य राष्ट्रगीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसके गायन में जुटी सभा में जानबूझकर व्यवधान डालने को दंडनीय बनाना है।
PRS India के अनुसार, यह संशोधन पहले से राष्ट्रीय गान को मिलने वाले इस प्रकार के वैधानिक संरक्षण को राष्ट्रीय गीत तक विस्तारित करता है।
यानी, 2026 का कानून ‘वंदे मातरम’ की राष्ट्रीय गीत के रूप में नई संवैधानिक घोषणा नहीं करता, बल्कि उसके सम्मान और गायन को कानूनी संरक्षण देता है।
संसद में भी गूंजा पूरा ‘वंदे मातरम’
‘वंदे मातरम’ को लेकर इस वर्ष राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चा उस समय भी तेज हुई, जब 13 अगस्त को मानसून सत्र के अंतिम दिन पहली बार लोकसभा की कार्यवाही की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवसर पर राष्ट्रगीत के छह अंतरे प्रस्तुत किए गए।
इससे पहले मार्च 2026 में आकाशवाणी ने भी छह अंतरों वाले संस्करण के प्रसारण की शुरुआत की थी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, 26 मार्च से आकाशवाणी के सभी केंद्रों पर राष्ट्रगीत का नया छह-अंतरा संस्करण प्रसारित किया जाना शुरू हुआ।
BJP कार्यालय में भी गाया गया पूरा राष्ट्रगीत
22 अगस्त को BJP की नई राष्ट्रीय टीम की पहली महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक से पहले पार्टी मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरों का गायन किया गया। इसमें नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया।
इसके बाद पार्टी की बैठक में ‘वंदे मातरम’ को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया। इससे BJP ने यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की कि वह राष्ट्रगीत के पूर्ण संस्करण और उसकी ऐतिहासिक विरासत को लेकर अपने रुख पर कायम है।
अब देशभर में अभियान चलाएगी BJP
BJP के प्रस्ताव में केवल कांग्रेस के फैसले की आलोचना तक बात सीमित नहीं रखी गई। पार्टी ने कहा है कि उसके कार्यकर्ता देशभर में अभियान चलाकर लोगों, खासकर युवाओं तक ‘वंदे मातरम’ का इतिहास, अर्थ, राष्ट्रीय महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका पहुंचाएंगे।
इस मुद्दे पर BJP और कांग्रेस के बीच आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। एक तरफ BJP इसे राष्ट्रगीत के सम्मान और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस अपने 1937 के ऐतिहासिक निर्णय और धार्मिक समावेशिता के तर्क के साथ अपने रुख का बचाव कर रही है।
वंदे मातरम विवाद में अब तक क्या हुआ?
- 1937: कांग्रेस ने विवाद के बीच सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो अंतरों को अपनाने का फैसला किया।
- 19 अगस्त 2026: कांग्रेस कार्यसमिति ने 1937 के निर्णय को फिर से स्वीकार करते हुए पार्टी कार्यक्रमों में पहले दो अंतरों के गायन की बात दोहराई।
- 20 अगस्त: BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और उसके फैसले को राष्ट्रगीत के प्रति अनादर बताया।
- 22 अगस्त: BJP ने ‘वंदे मातरम’ की पूर्ण विरासत और सम्मान की रक्षा के लिए प्रस्ताव पारित किया।
- 2026: संसद द्वारा कानून में संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम’ के गायन को रोकने या उसके आयोजन में जानबूझकर बाधा डालने पर वैधानिक संरक्षण लागू हुआ।
निष्कर्ष
‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल गीत के कितने अंतरे गाए जाएं, इस सवाल तक सीमित नहीं रह गया है। यह मुद्दा इतिहास, राष्ट्रीय प्रतीकों, धार्मिक संवेदनशीलता, राजनीतिक विचारधारा और वोट बैंक की राजनीति के बीच चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है।
BJP ने 22 अगस्त के अपने प्रस्ताव के जरिए पूरे ‘वंदे मातरम’ की विरासत को आगे बढ़ाने और इसे देशभर में प्रचारित करने का संकल्प लिया है। दूसरी ओर कांग्रेस 1937 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला देते हुए केवल पहले दो अंतरों के गायन की अपनी परंपरा पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का एक प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।



