19 Sep 2026, 05:46 PM

तिहाड़ जेल में बंद पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का निधन, 84 साल की उम्र में ली अंतिम सांस
1984 दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन
नई दिल्ली: 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह पिछले करीब सात वर्षों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सज्जन कुमार को दिसंबर 2018 में दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 दंगा मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उन्होंने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। अप्रैल 2022 में उन्हें एक मामले में जमानत मिली थी, हालांकि दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण वह जेल से बाहर नहीं आ सके।
तिहाड़ जेल में काट रहे थे उम्रकैद
सज्जन कुमार लंबे समय से तिहाड़ जेल में बंद थे। अप्रैल 2026 में उन्होंने अपनी बीमार पत्नी से मुलाकात के लिए सुप्रीम कोर्ट से जमानत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका स्वीकार नहीं की थी।
1984 दंगा मामले में हुई थी सजा
सज्जन कुमार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या से जुड़े मामले में दोषी ठहराया गया था। अदालत ने माना था कि उन्होंने भीड़ को उकसाने में भूमिका निभाई थी। इसी मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा दी गई।
इससे पहले 2013 में निचली अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। 17 दिसंबर 2018 को हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए उन्हें दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई।
सजा के बाद कांग्रेस से दिया इस्तीफा
दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के अगले ही दिन सज्जन कुमार ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। वह 1984 के दंगों से जुड़े मामलों में लंबे समय तक जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करते रहे।
तीन बार लोकसभा सांसद रहे सज्जन कुमार
सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को हुआ था। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत दिल्ली नगर निगम के पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वह दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी में महासचिव बने।
1980 में वह बाहरी दिल्ली लोकसभा सीट से पहली बार सांसद चुने गए। इसके बाद 1991 और 2004 में भी उन्होंने लोकसभा चुनाव जीता। उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय गांधी का करीबी माना जाता था। राजनीति में आने से पहले वह बेकरी का कारोबार करते थे।
जांच से लेकर सजा तक लंबा चला मामला
1984 के दंगा मामलों में सज्जन कुमार की भूमिका की जांच कई वर्षों तक चली। नानावती आयोग की सिफारिशों के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। जांच के दौरान उन पर हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और हिंसा भड़काने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
निचली अदालत से राहत मिलने के बाद सीबीआई की अपील पर मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां 2018 में उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। इसके बाद से वह जेल में ही सजा काट रहे थे।



