19 Sep 2026, 06:25 PM

राहुल गांधी प्रयागराज नहीं, रांची जाते तो बेहतर होता… किरेन रिजिजू का तंज, छात्रों के मुद्दे पर सियासत तेज
प्रयागराज में राहुल गांधी ने उठाए युवाओं के सवाल, किरेन रिजिजू ने रांची जाने की दी नसीहत नई दिल्ली/प्रयागराज: युवाओं के रोजगार, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और […]
प्रयागराज में राहुल गांधी ने उठाए युवाओं के सवाल, किरेन रिजिजू ने रांची जाने की दी नसीहत
नई दिल्ली/प्रयागराज: युवाओं के रोजगार, पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें प्रयागराज के बजाय झारखंड के रांची जाना चाहिए था, जहां छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी को प्रयागराज के बजाय रांची जाना चाहिए था।”
रिजिजू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राहुल गांधी प्रयागराज में छात्रों के बीच रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेर रहे थे।
राहुल गांधी ने युवाओं के सामने रोजगार का मुद्दा उठाया
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने युवाओं के सामने रोजगार की समस्या को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के सामने रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है।
राहुल गांधी ने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, क्रेडिट तक पहुंच और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
उन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया और ऑनलाइन कंटेंट में उलझाए रखने के बाद कम वेतन वाले कामों तक सीमित किए जाने का आरोप भी लगाया।
‘आपको इस देश में रोजगार नहीं मिल सकता’
राहुल गांधी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें लगातार रील्स देखने, व्हाट्सऐप मैसेज भेजने और इंस्टाग्राम पर कंटेंट देखने या बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके बाद उनसे ब्लिंकइट या उबर जैसे प्लेटफॉर्म के लिए काम करने या शारीरिक श्रम करने की उम्मीद की जाती है।
उन्होंने दावा किया कि इस तरह की व्यवस्था में युवा 21वीं सदी की डिजिटल लत में फंस सकते हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं हैं।
नोटबंदी और GST पर भी राहुल का हमला
राहुल गांधी ने अपने भाषण में सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने नोटबंदी और GST को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए रोजगार पैदा करने वाला सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग है, लेकिन देश इस क्षेत्र में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे रह गया है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि नोटबंदी और GST की नीतियों ने छोटे कारोबारियों तथा चमड़ा, कपड़ा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाया, जिससे रोजगार पैदा करने की क्षमता प्रभावित हुई।
रांची में क्यों हो रहा छात्रों का प्रदर्शन?
इसी बीच झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र संगठनों का विरोध प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शनकारी उम्मीदवार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और फिलहाल उन्होंने आंदोलन वापस लेने से इनकार किया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों के एक गुट का नेतृत्व JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं। बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर उनकी भूख हड़ताल भी जारी रही।
स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार की ओर से पांच सदस्यीय मंत्रियों की समिति ने प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की।
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत बेनतीजा
सरकारी समिति ने अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इनमें JLKM से जुड़े प्रदर्शनकारी, कांग्रेस समर्थित NSUI, आदिवासी छात्र संघ (ACS) और झारखंड छात्र मोर्चा (JCM) के प्रतिनिधि शामिल रहे।
हालांकि बातचीत के बावजूद प्रदर्शनकारियों और सरकार के बीच गतिरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। छात्र संगठनों ने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।
रोजगार और भर्ती परीक्षा बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
राहुल गांधी के प्रयागराज दौरे और किरेन रिजिजू की प्रतिक्रिया के बाद रोजगार और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
एक तरफ विपक्ष युवाओं के बीच बेरोजगारी, पेपर लीक और महंगी शिक्षा को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार और उसके नेता विपक्षी नेताओं से जमीनी स्तर पर छात्रों के आंदोलनों के बीच पहुंचने की मांग कर रहे हैं।
प्रयागराज से लेकर रांची तक छात्रों के रोजगार और भर्ती परीक्षा से जुड़े मुद्दे अब केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आने वाले समय में ये राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन सकते हैं।



