19 Sep 2026, 05:46 PM

रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का खतरा! अमेरिकी सीनेट ने 86-11 से पास किया बड़ा बिल
रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ सकता है भारी! अमेरिकी सीनेट ने 86-11 से पास किया बड़ा प्रतिबंध बिल
वॉशिंगटन: रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ नए और कड़े प्रतिबंधों से जुड़े ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ को भारी बहुमत से पारित कर दिया है। बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 11 सीनेटरों ने इसका विरोध किया।
इस बिल का सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदते हैं। प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के अमेरिकी आयात पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया जाएगा। भारत और चीन रूस के ऊर्जा उत्पादों के बड़े खरीदार होने के कारण इस प्रावधान के दायरे में आ सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बिल?
भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है। ऐसे में यदि कानून लागू होने के बाद अमेरिका भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार और दोनों देशों के कारोबारी संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि बिल में भारत का नाम लेकर तत्काल कोई टैरिफ लागू नहीं किया गया है। अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के पास होगा।
चीन भी निशाने पर
भारत के साथ चीन भी रूसी ऊर्जा का बड़ा खरीदार है। नए अमेरिकी कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा से होने वाली आय पर दबाव बढ़ाना है, ताकि मॉस्को की युद्ध संबंधी आर्थिक क्षमता को कमजोर किया जा सके। बिल में रूस के अधिकारियों, कुलीन वर्ग, ऊर्जा परियोजनाओं और ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों व संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान है।
ईरान पर भी सख्ती
रूस के अलावा इस कानून में ईरान पर लगे प्रतिबंधों को और मजबूत करने के प्रावधान भी शामिल हैं। इस तरह अमेरिका ने एक ही विधेयक के जरिए रूस और ईरान दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की है।
दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बिल
इस कानून को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया था। उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले ट्रंप प्रशासन के साथ इस बिल के नए प्रारूप पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। बाद में उनके नाम पर ही इसे Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम दिया गया।
सीनेट में वोटिंग के दौरान उनकी जगह नियुक्त सीनेटर डार्लिन ग्राहम ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर निशाना साधते हुए कहा कि यह कानून रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए बनाया गया है।
ट्रंप की मंजूरी के लिए बिल में किए गए बदलाव
इस विधेयक का शुरुआती मसौदा काफी व्यापक था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल करने के लिए इसे काफी सीमित और संशोधित किया गया। ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेन को अमेरिकी सहायता की नीति में भी बदलाव किया है और हथियारों की बिक्री पर अधिक जोर दिया है।
अभी लागू नहीं हुआ कानून
सीनेट से मंजूरी मिलने के बावजूद यह कानून अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। इसे अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) से पारित होना होगा। इसके बाद ही राष्ट्रपति के हस्ताक्षर और आगे की कार्रवाई के जरिए यह कानून प्रभावी हो सकेगा।
यानी फिलहाल भारत पर 100% अमेरिकी टैरिफ लागू नहीं हुआ है, लेकिन रूस से तेल खरीद को लेकर भारत के लिए एक नया व्यापारिक और कूटनीतिक दबाव जरूर पैदा हो गया है।



