19 Sep 2026, 05:46 PM

PM मोदी का वीडियो हटाने पर Meta पर सख्त संसदीय रुख, 3 दिन में मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का Facebook वीडियो अस्थायी रूप से हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक और संसदीय स्तर पर गंभीर हो गया है। संसद की संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति ने Meta को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कंपनी के संस्थापक एवं CEO मार्क जुकरबर्ग तीन दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो भारत में Meta को मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा समाप्त करने की सिफारिश की जा सकती है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो हटाया जाना केवल एक तकनीकी गलती नहीं माना जा सकता। समिति के अनुसार यह संदेश देश के करोड़ों लोगों तक पहुंचने वाला था और इसे हटाना बेहद गंभीर विषय है। समिति ने मांग की है कि Meta न केवल सार्वजनिक माफी मांगे, बल्कि इस घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करे।
समिति ने सोशल मीडिया कंपनियों को भारतीय कानूनों का सख्ती से पालन करने की चेतावनी भी दी है। Google, YouTube, X, Facebook, WhatsApp, Instagram और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स से कहा गया है कि बच्चों के यौन शोषण (CSAM) और महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े कंटेंट पर भारतीय कानूनों के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक के दौरान तेलंगाना में इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों को आवश्यक स्वीकृति नहीं मिलने पर भी सवाल उठाए गए। समिति ने यह भी जानना चाहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ FIR दर्ज कराने की पहल किस स्तर पर हुई और जांच में जरूरत पड़ने पर व्यक्तिगत जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Gen Z युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। यह वीडियो कुछ समय बाद Facebook से हट गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। बढ़ते विरोध के बीच Meta ने वीडियो दोबारा बहाल कर दिया और सफाई दी कि यह तकनीकी खराबी के कारण अस्थायी रूप से हटा था। कंपनी ने इस पर खेद भी जताया, लेकिन अब मामला संसदीय समिति के सामने पहुंच चुका है।



