19 Sep 2026, 05:46 PM

मीडिया आए लेकिन PM मोदी से सवाल न पूछे जाएं, मोदी-ट्रंप मुलाकात में प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर नया विवाद
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की फ्रांस में हुई मुलाकात को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के एक बयान ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। गोर ने दावा किया है कि जून में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और ट्रंप की बैठक से पहले भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से अमेरिका के सामने एक खास अनुरोध रखा गया था।
अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, भारत चाहता था कि बैठक के दौरान मीडिया को अंदर आने की अनुमति दी जाए, लेकिन पत्रकारों को दोनों नेताओं से सवाल पूछने का मौका न मिले।

क्या बोले सर्जियो गोर?
इकॉनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम में बोलते हुए सर्जियो गोर ने दावा किया कि बैठक से पहले उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारतीय पक्ष की इस इच्छा के बारे में बताया था।
गोर के अनुसार, ट्रंप ने इस पर सहमति जताते हुए कहा था कि इसमें कोई समस्या नहीं है। इसके बाद बैठक में मीडिया को प्रवेश दिया गया।
लेकिन बैठक शुरू होने के बाद स्थिति कथित तौर पर बदल गई। गोर के मुताबिक, ट्रंप ने मीडिया की ओर देखते हुए पत्रकारों से सवाल लेने की पेशकश कर दी। इसके बाद करीब 45 मिनट तक सवाल-जवाब का सिलसिला चला।
इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्रपति ट्रंप के साथ मौजूद थे, लेकिन सवाल मुख्य रूप से ट्रंप से ही किए गए।
गोर के दावे से फिर शुरू हुई पुरानी बहस
सर्जियो गोर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रेस कॉन्फ्रेंस और पत्रकारों के सवाल लेने को लेकर पुरानी बहस फिर तेज हो गई है।
मोदी सरकार के आलोचक इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि अगर भारतीय पक्ष ने वास्तव में पत्रकारों को सवाल पूछने से रोकने का अनुरोध किया था, तो इसकी वजह क्या थी।
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने विदेश मंत्रालय से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग भी की है।
विपक्ष ने भी साधा निशाना
अमेरिकी राजदूत के बयान को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेशी नेताओं के साथ बैठकों के दौरान पत्रकारों के सीधे सवालों का सामना क्यों नहीं करते।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को प्रेस के सवालों से बचाने के लिए विदेश मंत्रालय की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का अनुरोध किया गया था।
हालांकि, सर्जियो गोर के इस दावे पर भारतीय विदेश मंत्रालय या केंद्र सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने खुद पत्रकारों से लिए सवाल
जून में फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई थी। बैठक के दौरान बड़ी संख्या में पत्रकार और कैमरा क्रू मौजूद थे।
बैठक शुरू होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देना शुरू किया। भारत-अमेरिका संबंधों से लेकर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े मुद्दों तक कई सवाल उनसे पूछे गए।
प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान ट्रंप के साथ बैठे रहे और पत्रकारों के सवालों का जवाब नहीं दिया।

मोदी-ट्रंप के रिश्तों को बताया मजबूत
दिलचस्प बात यह है कि सर्जियो गोर ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के संबंधों को काफी मजबूत और दोस्ताना बताया।
लेकिन अमेरिकी राजदूत के ‘नो क्वेश्चन’ वाले दावे के सामने आने के बाद भारत में इसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भारतीय विदेश मंत्रालय ने वास्तव में मोदी-ट्रंप मुलाकात के दौरान पत्रकारों के सवाल नहीं लेने का अनुरोध किया था?
इस मामले में भारत सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है।



