19 Sep 2026, 05:45 PM

प्रेमी-प्रेमिका के विवाद ने खोला MPSC पेपर लीक का राज, 7वीं रैंक पाने वाली उम्मीदवार हिरासत में
मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2026 के कथित पेपर लीक मामले में बड़ी सफलता मिली है। मामले में वांछित उम्मीदवार ऋतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में लिया गया है।
इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच पहले ही 26 अगस्त को छह आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। गिरफ्तार आरोपियों को अदालत ने 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा था। अब जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पेपर लीक से जुड़े कई नए और चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं।
7वीं रैंक हासिल करने वाली उम्मीदवार पर शक
पुलिस जांच के अनुसार, ऋतुजा पाटिल को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि शक से बचने के लिए उसे जानबूझकर कुछ सवालों के गलत जवाब देने की सलाह दी गई थी। आरोप है कि ऋतुजा ने करीब 10 सवाल जानबूझकर गलत किए।
इसके बावजूद ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के परिणाम में ऋतुजा पाटिल को 7वीं रैंक मिली थी।
प्रेम संबंध से खुला पेपर लीक का राज?
जांच में सामने आया है कि ऋतुजा पाटिल और गौरव पाटिल के बीच कथित तौर पर प्रेम संबंध थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों के रिश्ते में विवाद और ब्रेकअप के बाद गौरव ने पेपर लीक की जानकारी बाहर लाने का फैसला किया।
गौरव पाटिल उर्फ लोकेश ने एफडीए परीक्षा से जुड़ा सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वाले ऋषिकेश गांगुर्दे से संपर्क किया और कथित तौर पर दावा किया कि उसके पास लीक हुए प्रश्नपत्र की कॉपी मौजूद है। इसके बाद मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा और पूरे कथित रैकेट का खुलासा शुरू हुआ।
पिता और कोचिंग संचालक तक पहुंची जांच
पुलिस के अनुसार, ऋतुजा ने कथित तौर पर अपने पिता अमृत पाटिल से परीक्षा का पेपर हासिल करने की बात कही थी। इसके बाद अमृत पाटिल कथित बिचौलिए प्रवीण पाटिल के संपर्क में आया।
प्रवीण पाटिल नंदुरबार में कोचिंग क्लास संचालित करता है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक नेटवर्क में उसकी भूमिका कितनी बड़ी थी और क्या अन्य उम्मीदवारों को भी प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था।
12 लाख रुपये में हुई थी कथित डील
क्राइम ब्रांच की जांच में वित्तीय लेन-देन का एंगल भी सामने आया है। पुलिस को जानकारी मिली है कि प्रवीण पाटिल और एमपीएससी से जुड़े गिरफ्तार अधिकारियों के बीच करीब 5 लाख रुपये का लेन-देन हुआ था।
जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर हासिल करने की पूरी डील करीब 12 लाख रुपये में हुई थी। अब पुलिस बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
परीक्षा से दो दिन पहले लीक हुआ था पेपर
पुलिस जांच के मुताबिक, ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से करीब दो दिन पहले लीक हो गया था। इसके बाद प्रश्नपत्र की जानकारी कथित तौर पर कई लोगों तक पहुंची।
मामले में एमपीएससी से जुड़े तीन अधिकारियों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। इनमें सहायक कक्ष अधिकारी विश्वेश्वर नकटे, एमपीएससी के अवर सचिव गोपाल मराठे और अवर सचिव अभिजीत लेंडवे शामिल हैं। पुलिस इनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है।
नंदुरबार कनेक्शन की जांच तेज
जांच एजेंसियों को इस मामले में नंदुरबार कनेक्शन भी महत्वपूर्ण लग रहा है। प्रवीण पाटिल, ऋतुजा के पिता अमृत पाटिल और मामले से जुड़े कुछ अन्य लोगों का संबंध नंदुरबार से बताया जा रहा है।
क्राइम ब्रांच को आशंका है कि पेपर लीक नेटवर्क केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं हो सकता और जांच आगे बढ़ने पर अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और वित्तीय लेन-देन से लेकर पेपर लीक के स्रोत तक हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश जारी है।



