BRICS Summit 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर टिकीं निगाहें

12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होगा 18वां BRICS शिखर सम्मेलन | 15,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में BRICS देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष प्रतिनिधि शामिल होंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आने की पुष्टि के बाद इस सम्मेलन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खास 관심 बढ़ गया है।

चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को भारत पहुंचेंगे और BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर दुनिया की नजर

शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों में कई महत्वपूर्ण मुद्दे मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।

ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के नेताओं के बीच संभावित बातचीत और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर होने वाली गतिविधियों पर सभी की नजर रहेगी।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

BRICS Summit को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद मजबूत किया गया है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार:

  • तुगलक रोड इलाके में करीब 500 CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
  • आयोजन स्थल के आसपास कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
  • करीब 15,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी।
  • अर्धसैनिक बलों की करीब 200 कंपनियां सुरक्षा व्यवस्था में शामिल रहेंगी।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मनीष कुमार अग्रवाल के मुताबिक, सम्मेलन में कई राष्ट्राध्यक्ष, सरकारों के प्रमुख, मंत्री, विदेशी प्रतिनिधिमंडल और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। सुरक्षा व्यवस्था इस तरह तैयार की गई है कि आम लोगों को कम से कम असुविधा हो।

BRICS क्या है और इसमें कौन-कौन से देश हैं?

BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक अंतरराष्ट्रीय समूह है। BRICS नाम इसके शुरुआती सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के पहले अक्षरों से बना है।

आज इसके पूर्ण सदस्यों में शामिल हैं:

ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया।

मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE जनवरी 2024 में BRICS के पूर्ण सदस्य बने, जबकि इंडोनेशिया जनवरी 2025 में इसका हिस्सा बना।

BRICS में पार्टनर देशों की भी बढ़ी भूमिका

BRICS का विस्तार केवल पूर्ण सदस्यों तक सीमित नहीं रहा है। 2025 में कई देशों को पार्टनर देश का दर्जा दिया गया।

इनमें बेलारूस, बोलीविया, कज़ाखस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।

BRICS में शामिल होने या इसके साथ जुड़ने में कई अन्य देशों ने भी रुचि दिखाई है।

BRICS की शुरुआत कैसे हुई?

BRICS शब्द की शुरुआत ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने की थी। उन्होंने वर्ष 2001 में अपने शोधपत्र में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया था।

उस समय इसमें चार देश शामिल थे:

Brazil + Russia + India + China = BRIC

बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

2009 में हुआ पहला BRIC शिखर सम्मेलन

BRIC देशों की पहली आधिकारिक शिखर बैठक 16 जून 2009 को रूस के येकाटेरिनबर्ग में हुई थी।

इसके बाद 2010 में ब्राज़ील में BRIC शिखर सम्मेलन हुआ। इसी वर्ष दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल करने का फैसला हुआ और इसके बाद समूह BRICS कहलाने लगा।

दक्षिण अफ्रीका ने अप्रैल 2011 में चीन के सान्या में आयोजित तीसरे BRICS शिखर सम्मेलन में पहली बार हिस्सा लिया।

BRICS का उद्देश्य क्या है?

BRICS का उद्देश्य प्रमुख विकासशील देशों को एक मंच पर लाना और वैश्विक आर्थिक एवं राजनीतिक व्यवस्था में उनकी भूमिका को मजबूत करना है।

समूह के देश मुख्य रूप से:

  • आर्थिक सहयोग
  • व्यापार
  • निवेश
  • विकास
  • वित्तीय सहयोग
  • वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार

जैसे मुद्दों पर मिलकर काम करते हैं।

हालांकि, BRICS के सदस्य देशों के बीच कई महत्वपूर्ण राजनीतिक मतभेद भी हैं। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद इसका प्रमुख उदाहरण है।

2050 तक BRICS की बड़ी भूमिका की उम्मीद

कुछ अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS के कई सदस्य देश आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

अनुमान है कि चीन और भारत विनिर्माण और सेवाओं के बड़े वैश्विक केंद्र बन सकते हैं, जबकि रूस और ब्राज़ील कच्चे माल की आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

BRICS और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव

BRICS के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका की चिंता भी सामने आती रही है।

2025 के BRICS शिखर सम्मेलन के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने BRICS देशों की कथित “अमेरिका विरोधी नीतियों” का समर्थन करने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी।

इससे BRICS और पश्चिमी देशों के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर बहस और तेज हुई।

भारत के लिए क्यों अहम है 2026 का BRICS Summit?

भारत के लिए इस वर्ष का BRICS सम्मेलन कई मायनों में महत्वपूर्ण है।

भारत इस बार सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और ऐसे समय में कर रहा है जब:

  • मध्य पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है।
  • वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
  • भारत-चीन संबंधों पर लगातार नजर है।
  • BRICS का लगातार विस्तार हो रहा है।
  • वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ रही है।

BRICS की वैश्विक ताकत कितनी बड़ी है?

BRICS2026 की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, BRICS देशों की संयुक्त आबादी दुनिया की कुल आबादी का लगभग 49.5% है।

वैश्विक GDP में इन देशों की हिस्सेदारी करीब 40%, जबकि वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी लगभग 26% बताई गई है।

यही वजह है कि BRICS को अब केवल आर्थिक समूह के तौर पर नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से प्रभावशाली होते मंच के रूप में देखा जा रहा है।

नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन क्यों खास है?

18वां BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलावों से गुजर रही है।

एक तरफ BRICS का विस्तार हो रहा है, दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ इसके संबंधों को लेकर बहस तेज है। वहीं, शी जिनपिंग की भारत यात्रा इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है।

अब सभी की नजरें इस बात पर होंगी कि नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक से भारत-चीन संबंधों, वैश्विक व्यापार, तेल बाजार, आर्थिक सहयोग और BRICS के भविष्य को लेकर क्या संकेत सामने आते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *